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Fatir · 35:14

إِنْ تَدْعُوهُمْ لَا يَسْمَعُوا دُعَاءَكُمْ وَلَوْ سَمِعُوا مَا اسْتَجَابُوا لَكُمْ ۖ وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ يَكْفُرُونَ بِشِرْكِكُمْ ۚ وَلَا يُنَبِّئُكَ مِثْلُ خَبِيرٍ

यदि तुम उन्हें पुकारते हो, तो वे नहीं सुनते तुम्हारी पुकार को और यदि सुन भी लें, तो नहीं उत्तर दे सकते तुम्हें और प्रलय के दिन वे नकार देंगे तुम्हारे शिर्क (साझी बनाने) को और आपको कोई सूचना नहीं देगा सर्वसूचित जैसी।[1]
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1. इस आयत में प्रलय के दिन उन के पूज्य की दशा का वर्णन किया गया है कि यह प्रलय के दिन उन के शिर्क को अस्वीकार कर देंगे। और अपने पुजारियों से विरक्त होने की घोषणा कर देंगे। जिस से विद्वित हुआ कि अल्लाह का कोई साझी नहीं है। और जिन को मुश्रिकों ने साझी बना रखा है वह सब धोखा है।

Тефсир на вашем језику

Тефсири на арапском

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