Hindi

Ali 'Imran · 3:188

لَا تَحْسَبَنَّ الَّذِينَ يَفْرَحُونَ بِمَا أَتَوْا وَيُحِبُّونَ أَنْ يُحْمَدُوا بِمَا لَمْ يَفْعَلُوا فَلَا تَحْسَبَنَّهُمْ بِمَفَازَةٍ مِنَ الْعَذَابِ ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ

(हे नबी!) जो[1] अपने करतूतों पर प्रसन्न हो रहे हैं और चाहते हैं कि उन कर्मों के लिए सराहे जायें, जो उन्होंने नहीं किये। आप उन्हें कदापि न समझें कि यातना से बचे रहेंगे तथा (वास्तविकता ये कि) उन्हीं के लिए दुःखदायी यातना है।
____________________
1. अबू सईद रज़ियल्लाहु अन्हु कहते हैं कि कुछ द्विधावादी रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के युग में आप युध्द के लिये निकलते तो आप का साथ नहीं देते थे। और इस पर प्रसन्न होते थे और जब आप वापिस होते तो बहाने बनाते और शपथ लेते थे। और जो नहीं किया है, उस की सराहना चाहते थे। इसी पर यह आयत उतरी। (सह़ीह़ बुख़ारीः4567)

Тефсир на вашем језику

Тефсири на арапском

Превод

Слушај