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Ibrahim · 14:9

أَلَمْ يَأْتِكُمْ نَبَأُ الَّذِينَ مِنْ قَبْلِكُمْ قَوْمِ نُوحٍ وَعَادٍ وَثَمُودَ ۛ وَالَّذِينَ مِنْ بَعْدِهِمْ ۛ لَا يَعْلَمُهُمْ إِلَّا اللَّهُ ۚ جَاءَتْهُمْ رُسُلُهُمْ بِالْبَيِّنَاتِ فَرَدُّوا أَيْدِيَهُمْ فِي أَفْوَاهِهِمْ وَقَالُوا إِنَّا كَفَرْنَا بِمَا أُرْسِلْتُمْ بِهِ وَإِنَّا لَفِي شَكٍّ مِمَّا تَدْعُونَنَا إِلَيْهِ مُرِيبٍ

क्या तुम्हारे पास उनका समाचार नहीं आया, जो तुमसे पहले थे; नूह़, आद और समूद की जाति का और जो उनके पश्चात् हुए, जिन्हें अल्लाह ही जानता है? उनके पास उनके रसूल प्रत्यक्ष प्रमाण लाये, तो उन्होंने अपने हाथ अपने मुखों में दे[1] लिए और कह दिया कि हम उस संदेश को नहीं मानते, जिसके साथ तुम भेजे गये हो और वास्तव में, उसके बारे में संदेह में हैं, जिसकी ओर हमें बुला रहे हो, (तथा) द्विधा में हैं।
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1. यह ऐसी ही भाषा शैली है, जिसे हम अपनी भाषा में बालते हैं कि कानों पर हाथ रख लिया, और दाँतो से उँगली दबा ली।

Тефсир на вашем језику

Тефсири на арапском

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