Hindi

Ar-Ra'd · 13:33

أَفَمَنْ هُوَ قَائِمٌ عَلَىٰ كُلِّ نَفْسٍ بِمَا كَسَبَتْ ۗ وَجَعَلُوا لِلَّهِ شُرَكَاءَ قُلْ سَمُّوهُمْ ۚ أَمْ تُنَبِّئُونَهُ بِمَا لَا يَعْلَمُ فِي الْأَرْضِ أَمْ بِظَاهِرٍ مِنَ الْقَوْلِ ۗ بَلْ زُيِّنَ لِلَّذِينَ كَفَرُوا مَكْرُهُمْ وَصُدُّوا عَنِ السَّبِيلِ ۗ وَمَنْ يُضْلِلِ اللَّهُ فَمَا لَهُ مِنْ هَادٍ

तो क्या जो प्रत्येक प्राणी के करतूत से अवगत है और उन्होंने उस (अल्लाह) का साझी बना लिया है, आप कहिए कि उनके नाम बताओ या तुम उसे उस चीज़ से सूचित कर रहे हो, जिसे वह धरती में नहीं जानता या ओछी बात[1] करते हो? बल्कि काफ़िरों के लिए उनके छल सुशोभित बना दिये गये हैं और सीधी राह से रोक दिये गये हैं और जिसे अल्लाह कुपथ कर दे, तो उसे कोई राह दिखाने वाला नहीं।
____________________
1. अर्थात निर्मूल और निराधार।

Тефсир на вашем језику

Тефсири на арапском

Превод

Слушај