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Hud · 11:47

قَالَ رَبِّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ أَنْ أَسْأَلَكَ مَا لَيْسَ لِي بِهِ عِلْمٌ ۖ وَإِلَّا تَغْفِرْ لِي وَتَرْحَمْنِي أَكُنْ مِنَ الْخَاسِرِينَ

नूह़ ने कहाः मेरे पालनहार! मैं तेरी शरण चाहता हूँ कि मैं तुझसे ऐसी चीज़ की माँग करूँ, जिस (की वास्तविक्ता) का मुझे कोई ज्ञान नहीं है[1] और यदि तूने मुझे क्षमा नहीं किया और मुझपर दया न की, तो मैं क्षतिग्रस्तों में हो जाऊँगा।
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1. अर्थात जब नूह़ (अलैहिस्सलाम) को बता दिया गया कि तुम्हारा पुत्र ईमान वालों में से नहीं है, इस लिये वह अल्लाह के अज़ाब से बच नहीं सकता तो नूह़ तुरन्त अल्लाह से क्षमा माँगने लगे।

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