الهندية
سورة المطففين · 83:6
يَوْمَ يَقُومُ النَّاسُ لِرَبِّ الْعَالَمِينَ
जिस दिन सभी, विश्व के पालनहार के सामने खड़े होंगे।[1]
____________________
1. (1-6) इस सूरह की प्रथम छः आयतों में इसी व्यवसायिक विश्वास घात पर पकड़ की गई है कि न्याय तो यह है कि अपने लिये अन्याय नहीं चाहते तो दूसरों के साथ न्याय करो। और इस रोग का निवारण अल्लाह के भय तथा परलोक पर विश्वास ही से हो सकता है। क्योंकि इस स्थिति में निक्षेप (अमानतदारी) एक नीति ही नहीं बल्कि धार्मिक कर्तव्य होगा औ इस पर स्थित रहना लाभ तथा हानि पर निर्भर नहीं रहेगा।
____________________
1. (1-6) इस सूरह की प्रथम छः आयतों में इसी व्यवसायिक विश्वास घात पर पकड़ की गई है कि न्याय तो यह है कि अपने लिये अन्याय नहीं चाहते तो दूसरों के साथ न्याय करो। और इस रोग का निवारण अल्लाह के भय तथा परलोक पर विश्वास ही से हो सकता है। क्योंकि इस स्थिति में निक्षेप (अमानतदारी) एक नीति ही नहीं बल्कि धार्मिक कर्तव्य होगा औ इस पर स्थित रहना लाभ तथा हानि पर निर्भर नहीं रहेगा।