सूरह 97 · जुज़ 30
Al-Qadr · 97:5
سَلَامٌ هِيَ حَتَّىٰ مَطْلَعِ الْفَجْرِ
वह शान्ति की रात्रि है, जो भोर होने तक रहती है।[1]
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1. इस का अर्थ यह है कि संध्या से भोर तक यह रात्रि सर्वथा शुभ तथा शान्तिमय होती है। सह़ीह़ ह़दीसों से स्पष्ट होता है कि यह शुभ रात्रि रमज़ान की अन्तिम दस रातों में से कोई एक रात है। इसलिये हमारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम इन दस रातों को अल्लाह की उपासना में बिताते थे।
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1. इस का अर्थ यह है कि संध्या से भोर तक यह रात्रि सर्वथा शुभ तथा शान्तिमय होती है। सह़ीह़ ह़दीसों से स्पष्ट होता है कि यह शुभ रात्रि रमज़ान की अन्तिम दस रातों में से कोई एक रात है। इसलिये हमारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम इन दस रातों को अल्लाह की उपासना में बिताते थे।
तफ़सीर
यह बरकत वाली रात उसके शुरू होने से लेकर फ़ज्र के उदय होने पर उसके अंत तक सर्वथा भलाई ही भलाई है।
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