सूरह 95 · जुज़ 30
At-Tin · 95:7
فَمَا يُكَذِّبُكَ بَعْدُ بِالدِّينِ
फिर (तुम मानव जाति) प्रतिफल (बदले) के दिन को क्यों झुठलाते हो?
तफ़सीर
तो (ऐ इनसान!) तुझे कौन-सी चीज़ बदले के दिन को झुठलाने पर उकसाती है, जबकि तूने उसकी शक्ति एवं क्षमता की बहुत-सी निशानियाँ देखी हैं?
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