सूरह 93 · जुज़ 30

Ad-Duha · 93:9

فَأَمَّا الْيَتِيمَ فَلَا تَقْهَرْ

तो तुम अनाथ पर क्रोध न करना।[1]
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1. (1-9) इन आयतों में अल्लाह ने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से फ़रमाया है कि तुम्हें यह चिन्ता कैसे हो गई है कि हम अप्रसन्न हो गये? हम ने तो तुम्हारे जन्म के दिन से निरन्तर तुम पर उपकार किये हैं। तुम अनाथ थे तो तुम्हारे पालन और रक्षा की व्यवस्था की। राह से अंजान थे तो राह दिखाई। निर्धन थे तो धनी बना दिया। यह बातें बता रही हैं कि तुम आरम्भ ही से हमारे प्रियवर हो और तुम पर हमारा उपकार निरन्तर है।

तफ़सीर

अतः आप किसी ऐसे व्यक्ति के साथ दुर्व्यवहार और उसका अपमान न करें जिसने बचपन में अपने पिता को खो दिया है।

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