सूरह 93 · जुज़ 30
Ad-Duha · 93:2
وَاللَّيْلِ إِذَا سَجَىٰ
और शपथ है रात्रि की, जब उसका सन्नाटा छा जाये!
तफ़सीर
और रात की क़सम खाई है, जब वह अंधेरी हो जाए और लोग उसमें काम-काज (गति) से रुक जाएँ।
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सूरह 93 · जुज़ 30
وَاللَّيْلِ إِذَا سَجَىٰ
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