सूरह 92 · जुज़ 30
Al-Layl · 92:18
الَّذِي يُؤْتِي مَالَهُ يَتَزَكَّىٰ
जो अपना धन, दान करता है, ताकि पवित्र हो जाये।
तफ़सीर
जो गुनाहों से पवित्र होने के लिए अपना धन नेकी के रास्तों में ख़र्च करता है।
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सूरह 92 · जुज़ 30
الَّذِي يُؤْتِي مَالَهُ يَتَزَكَّىٰ
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