सूरह 87 · जुज़ 30

Al-A'la · 87:15

وَذَكَرَ اسْمَ رَبِّهِ فَصَلَّىٰ

तथा अपने पालनहार के नाम का स्मरण किया और नमाज़ पढ़ी।[1]
____________________
1. (14-15) इन आयतों में कहा गया है कि सफलता मात्र उन के लिये है जो आस्था, स्वभाव तथा कर्म की पवित्रता को अपनायें, और नमाज़ अदा करते रहें।

तफ़सीर

और अपने पालनहार को, उसके निर्धारित किए हुए अज़कार (दुआओं) के साथ याद किया और उसी तरीक़े से नमाज़ पढ़ी, जिस तरीक़े से पढ़ना आवश्यक है।

पाठक में खोलें - पूरी सूरह पढ़ें

आपकी भाषा में तफ़सीर

अरबी तफ़सीरें

अनुवाद

सुनें