सूरह 86 · जुज़ 30
At-Tariq · 86:4
إِنْ كُلُّ نَفْسٍ لَمَّا عَلَيْهَا حَافِظٌ
प्रत्येक प्राणी पर एक रक्षक है।[1]
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1. (1-4) इन में आकाश के तारों को इस बात की गवाही में लाया गया है कि विश्व की कोई ऐसी वस्तु नहीं है जो एक रक्षक के बिना अपने स्थान पर स्थित रह सकती है, और वह रक्षक स्वयं अल्लाह है।
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1. (1-4) इन में आकाश के तारों को इस बात की गवाही में लाया गया है कि विश्व की कोई ऐसी वस्तु नहीं है जो एक रक्षक के बिना अपने स्थान पर स्थित रह सकती है, और वह रक्षक स्वयं अल्लाह है।
तफ़सीर
प्रत्येक प्राणी पर अल्लाह ने एक फ़रिश्ता नियुक्त कर रखा है, जो क़ियामत के दिन हिसाब के लिए उसके कार्यों को संरक्षित करता है।
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