सूरह 80 · जुज़ 30
Abasa · 80:42
أُولَٰئِكَ هُمُ الْكَفَرَةُ الْفَجَرَةُ
वही काफ़िर और कुकर्मी लोग हैं।[1]
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1. (33-42) इन आयतों का भावार्थ यह है कि संसार में किसी पर कोई आपदा आती है तो उस के अपने लोग उस की सहायता और रक्षा करते हैं। परन्तु प्रलय के दिन सब को अपनी अपनी पड़ी होगी और उस के कर्म ही उस की रक्षा करेंगे।
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1. (33-42) इन आयतों का भावार्थ यह है कि संसार में किसी पर कोई आपदा आती है तो उस के अपने लोग उस की सहायता और रक्षा करते हैं। परन्तु प्रलय के दिन सब को अपनी अपनी पड़ी होगी और उस के कर्म ही उस की रक्षा करेंगे।
तफ़सीर
वे लोग जिनकी स्थितियों का वर्णन किया गया है, यही लोग हैं जो कुफ़्र और कुकर्म दोनों करने वाले हैं।
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