सूरह 8 · जुज़ 10
Al-Anfal · 8:53
ذَٰلِكَ بِأَنَّ اللَّهَ لَمْ يَكُ مُغَيِّرًا نِعْمَةً أَنْعَمَهَا عَلَىٰ قَوْمٍ حَتَّىٰ يُغَيِّرُوا مَا بِأَنْفُسِهِمْ ۙ وَأَنَّ اللَّهَ سَمِيعٌ عَلِيمٌ
अल्लाह का ये नियम है कि वह उस पुरस्कार में परिवर्तन करने वाला नहीं है, जो किसी जाति पर किया हो, जब तक वह स्वयं अपनी दशा में परिवर्तन न कर ले और वास्तव में, अल्लाह सबकुछ सुनने-जानने वाला है।
तफ़सीर
यह दर्दनाक यातना इस कारण है कि अल्लाह जब किसी जाति को कोई अनुग्रह प्रदान करता है, तो उसे उनसे उस समय तक नहीं छीनता, जब तक कि वे ईमान, धार्मिकता और नेमतों के प्रति आभार की अपनी अच्छी स्थिति को बदलकर अल्लाह के इनकार, उसकी अवज्ञा और उसकी नेमतों की नाशुक्री की बुरी स्थिति को न अपना लें। और यह कि अल्लाह अपने बंदों की बातों को सुनने वाला, उनके कार्यों को जानने वाला है। उनकी कोई चीज़ उससे छिपी नहीं है।
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