सूरह 8 · जुज़ 10

Al-Anfal · 8:43

إِذْ يُرِيكَهُمُ اللَّهُ فِي مَنَامِكَ قَلِيلًا ۖ وَلَوْ أَرَاكَهُمْ كَثِيرًا لَفَشِلْتُمْ وَلَتَنَازَعْتُمْ فِي الْأَمْرِ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ سَلَّمَ ۗ إِنَّهُ عَلِيمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ

तथा (हे नबी! वो समय याद करें) जब आपको, (अल्लाह) आपके सपने[1] में, उन्हें (शत्रु को) थोड़ा दिखा रहा था और यदि उन्हें आपको अधिक दिखा देता, तो तुम साहस खो देते और इस (युध्द के) विषय में आपस में झगड़ने लगते। परन्तु अल्लाह ने तुम्हें बचा लिया। वास्तव में, वह सीनों (अन्तरात्मा) की बातों से भली-भाँति अवगत है।
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1. इस में उस स्वप्न की ओर संकेत है, जो आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को युध्द से पहले दिखाया गया था।

तफ़सीर

तथा (ऐ रसूल!) आप, अपने और मोमिनों के ऊपर अल्लाह की नेमत को याद करें, जब अल्लाह ने आपको सपने में मुश्रिकों की संख्या कम करके दिखाई, और आपने ईमान वालों को इसके बारे में बताया, तो वे इस शुभ समाचार से आनंदित हुए और अपने दुश्मन से मिलने और उससे लड़ने का उनका संकल्प और भी मज़बूत हो गया। यदि अल्लाह आपको मुश्रिकों की संख्या अधिक दिखाता, तो अवश्य ही आपके साथियों के संकल्प कमज़ोर पड़ जाते और वे लड़ने से भय खाने लगते। परंतु अल्लाह ने इससे सुरक्षित रखा और उन्हें असफलता से बचाया। इसलिए उन्हें अपने रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की नज़र में कम कर दिया। निःसंदेह वह सीनों की बातों से भली-भाँति अवगत, तथा दिलों के भेदों को जानने वाला है।

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