सूरह 8 · जुज़ 10

Al-Anfal · 8:41

۞ وَاعْلَمُوا أَنَّمَا غَنِمْتُمْ مِنْ شَيْءٍ فَأَنَّ لِلَّهِ خُمُسَهُ وَلِلرَّسُولِ وَلِذِي الْقُرْبَىٰ وَالْيَتَامَىٰ وَالْمَسَاكِينِ وَابْنِ السَّبِيلِ إِنْ كُنْتُمْ آمَنْتُمْ بِاللَّهِ وَمَا أَنْزَلْنَا عَلَىٰ عَبْدِنَا يَوْمَ الْفُرْقَانِ يَوْمَ الْتَقَى الْجَمْعَانِ ۗ وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ

और जान[1] लो कि तुम्हें जो कुछ ग़नीमत में मिला है, उसका पाँचवाँ भाग अल्लाह तथा रसूल और (आपके) समीपवर्तियों तथा अनाथों, निर्धनों और यात्रियों के लिए है, यदि तुम अल्लाह पर तथा उस (सहायता) पर ईमान रखते हो, जो हमने अपने भक्त पर निर्णय[2] के दिन उतारी, जिस दिन, दो सेनायें भिड़ गईं और अल्लाह जो चाहे, कर सकता है।
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1. इस में ग़नीमत (युध्द में मिले सामान) के वितरण का नियम बताया गया है कि उस के पाँच भाग कर के चार भाग मुजाहिदों को दिये जायें। पैदल को एक भाग तथा सवार को तीन भाग। फिर पाँचवाँ भाग अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैही व सल्लम) के लिये था जिसे आप अपने परिवार और समीपवर्तियों तथा अनाथों और निर्धनों की सहायता के लिये ख़र्च करते थे। इस प्रकार इस्लाम ने अनाथों और निर्धनों की सहायता पर सदा ध्यान दिया है। और ग़नीमत में उन्हें भी भाग दिया है, यह इस्लाम की वह विशेषता है जो किसी धर्म में नहीं मिलेगी। 2. अर्थात मुह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर। निर्णय के दिन से अभिप्राय बद्र के युध्द का दिन है जो सत्य और असत्य के बीच निर्णय का दिन था। जिस में काफ़िरों के बड़े बड़े प्रमुख और वीर मारे गये, जिन के शव बद्र के एक कुवें में फेंक दिये गये। फिर आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) कुवें के किनारे खड़े हुये और उन्हें उन के नामों से पुकारने लगे कि क्या तुम प्रसन्न होते कि अल्लाह और उस के रसूल को मानते? हम ने अपने पालनहार का वचन सच्च पाया तो क्या तुमने सच्च पाया? उमर (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने कहाः क्या आप ऐसे शरीरों से बात कर रहे हैं जिन में प्राण नहीं? आप ने कहाः मेरी बात तुम उन से अधिक नहीं सुन रहे हो। (सह़ीह़ बुख़ारीः3976)

तफ़सीर

और (ऐ ईमान वालो!) जान लो कि तुमने अल्लाह के मार्ग में काफ़िरों से जिहाद करते हुए जो ग़नीमत का धन हासिल किया है, उसे पाँच भागों में विभाजित किया जाएगा। उनमें से चार भाग मुजाहिदों में बाँट दिए जाएँगे, जबकि शेष पाँचवें भाग को फिर पाँच हिस्सों में विभाजित किया जाएगा : उसका एक हिस्सा अल्लाह और उसके रसूल का होगा, जिसे मुसलमानों के सार्वजनिक हितों में खर्च किया जाएगा, तथा एक हिस्सा नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के निकट-संबंधियों अर्थात् बनू हाशिम एवं बनू मुत्तलिब के लिए, एक हिस्सा अनाथों के लिए, एक हिस्सा गरीबों एवं मिसकीनों के लिए, तथा एक हिस्सा ऐसे यात्रियों के लिए है, जो रास्ते में फँसे हुए हों। यदि तुम अल्लाह पर तथा उस चीज़ पर ईमान रखते हो, जो हमने अपने बंदे मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर बद्र के दिन उतारी, जिसके द्वारा अल्लाह ने सत्य और झूठ के बीच अंतर कर दिया जब उसने तुम्हें तुम्हारे दुश्मनों पर जीत दिलाई। और अल्लाह, जिसने तुम्हारी मदद की, हर चीज़ का सामर्थ्य रखता है।

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