सूरह 8 · जुज़ 9
Al-Anfal · 8:39
وَقَاتِلُوهُمْ حَتَّىٰ لَا تَكُونَ فِتْنَةٌ وَيَكُونَ الدِّينُ كُلُّهُ لِلَّهِ ۚ فَإِنِ انْتَهَوْا فَإِنَّ اللَّهَ بِمَا يَعْمَلُونَ بَصِيرٌ
हे ईमान वालो! उनसे उस समय तक युध्द करो कि[1] फ़ित्ना (अत्याचार तथा उपद्रव) समाप्त हो जाये और धर्म पूरा अल्लाह के लिए हो जाये। तो यदि वे (अत्याचार से) रुक जायें तो अल्लाह उनके कर्मों को देख रहा है।
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1. इब्ने उमर (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) ने कहाः नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मुश्रिकों से उस समय युध्द कर रहे थे जब मुसलमान कम थे। और उन्हें अपने धर्म के कारण सताया, मारा और बंदी बना लिया जाता था। (सह़ीह़ बुख़ारीः4650, 4651)
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1. इब्ने उमर (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) ने कहाः नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मुश्रिकों से उस समय युध्द कर रहे थे जब मुसलमान कम थे। और उन्हें अपने धर्म के कारण सताया, मारा और बंदी बना लिया जाता था। (सह़ीह़ बुख़ारीः4650, 4651)
तफ़सीर
और (ऐ मोमिनो!) अपने काफिर दुश्मनों से युद्ध करो, यहाँ तक कि न शिर्क रहे और न ही मुसलमानों को अल्लाह के धर्म से रोकना, तथा धर्म और आज्ञाकारिता एकमात्र अल्लाह के लिए रह जाए, जिसमें उसका कोई साझी न हो। फिर यदि काफ़िर अपने शिर्क और अल्लाह के मार्ग से रोकने से बाज़ आ जाएँ, तो उन्हें छोड़ दो। क्योंकि अल्लाह उनके कर्मों को जानता है, उससे कोई बात छिपी नहीं है।
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