सूरह 8 · जुज़ 9
Al-Anfal · 8:27
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَخُونُوا اللَّهَ وَالرَّسُولَ وَتَخُونُوا أَمَانَاتِكُمْ وَأَنْتُمْ تَعْلَمُونَ
हे ईमान वालो! अल्लाह तथा उसके रसूल के साथ विश्वासघात न करो और न अपनी अमानतों (कर्तव्य) के साथ विश्वासघात[1] करो, जानते हुए।
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1. अर्थात अल्लाह और उस के रसूल के लिये जो तुम्हारा दायित्व और कर्तव्य है उसे पूरा करो। (इब्ने कसीर)
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1. अर्थात अल्लाह और उस के रसूल के लिये जो तुम्हारा दायित्व और कर्तव्य है उसे पूरा करो। (इब्ने कसीर)
तफ़सीर
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसके रसूल का अनुसरण करने वालो! अल्लाह और उसके रसूल के साथ, उनके आदेशों का पालन न करके और उनके निषेधों से न बचकर, विश्वासघात न करो, तथा तुम्हारे पास जो अमानत रखी जाए उसमें ख़यानत न करो, जबकि तुम जान रहे हो कि तुम्हारा यह काम ख़यानत है, अन्यथा तुम ख़यानत करने वालों में से हो जाओगे।
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