सूरह 8 · जुज़ 9

Al-Anfal · 8:24

يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اسْتَجِيبُوا لِلَّهِ وَلِلرَّسُولِ إِذَا دَعَاكُمْ لِمَا يُحْيِيكُمْ ۖ وَاعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ يَحُولُ بَيْنَ الْمَرْءِ وَقَلْبِهِ وَأَنَّهُ إِلَيْهِ تُحْشَرُونَ

हे ईमान वालो! अल्लाह और उसके रसूल की पुकार सुनो, जब तुम्हें उसकी ओर बुलाये, जो तुम्हारी[1] (आत्मा) को जीवन प्रदान करे और जान लो कि अल्लाह मानव और उसके दिल के बीच आड़े[2] आ जाता है और निःसंदेह तुम उसी के पास (अपने कर्म फल के लिए) एकत्र किये जाओगे।
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1. इस से अभिप्राय क़ुर्आन तथा इस्लाम है। (इब्ने कसीर) 2. अर्थात जो अल्लाह और उस के रसूल की बात नहीं मानता, तो अल्लाह उसे मार्गदर्शन भी नहीं देता।

तफ़सीर

ऐ अल्लाह पर ईमान रखने और उसके रसूल का अनुसरण करने वालो ! अल्लाह और उसके रसूल की पुकार का, उनके आदेशों का पालन करके और उनके निषेधों से बचकर जवाब दो, जब रसूल तुम्हें उस सत्य के लिए बुलाएँ, जिसमें तुम्हारा जीवन है। और इस बात से सुनिश्चित हो जाओ कि अल्लाह हर चीज़ की शक्ति रखता है। चुनाँचे वह इस बात की शक्ति रखता है कि यदि तुम सत्य को अस्वीकार करने के बाद उसे मानना चाहो तो वह तुम्हारे और सत्य को मानने के बीच रुकावट बन जाए। इसलिए सत्य को स्वीकार करने में जल्दी करो। और इस बात का यक़ीन रखो कि तुम क़ियामत के दिन अकेले अल्लाह ही के पास एकत्र किए जाओगे। फिर वह तुम्हें तुम्हारे दुनिया में किए हुए कर्मों का बदला देगा।

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