सूरह 76 · जुज़ 29
Al-Insan · 76:7
يُوفُونَ بِالنَّذْرِ وَيَخَافُونَ يَوْمًا كَانَ شَرُّهُ مُسْتَطِيرًا
जो (संसार में) पूरी करते रहे मनोतियाँ[1] और डरते रहे उस दिन से[2] जिसकी आपदा चारों ओर फैली हुई होगी।
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1. नज़र (मनौती) का अर्थ है, अल्लाह के समिप्य के लिये कोई कर्म अपने ऊपर अनिवार्य कर लेना। और किसी देवी-देवता तथा पीर-फ़क़ीर के लिये मनौती मानना शिर्क है। जिस को अल्लाह कभी भी क्षमा नहीं करेगा। अर्थात अल्लाह के लिये जो मनौतियाँ मानते रहे उसे पूरी करते रहे। 2. अर्थात प्रलय और ह़िसाब के दिन से।
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1. नज़र (मनौती) का अर्थ है, अल्लाह के समिप्य के लिये कोई कर्म अपने ऊपर अनिवार्य कर लेना। और किसी देवी-देवता तथा पीर-फ़क़ीर के लिये मनौती मानना शिर्क है। जिस को अल्लाह कभी भी क्षमा नहीं करेगा। अर्थात अल्लाह के लिये जो मनौतियाँ मानते रहे उसे पूरी करते रहे। 2. अर्थात प्रलय और ह़िसाब के दिन से।
तफ़सीर
इसे पीने वाले बंदों की विशेषताएँ यह हैं कि वे जिन नेकी के कामों को अपने ऊपर अनिवार्य कर लेते हैं, उन्हें पूरा करते हैं और उस दिन से डरते हैं, जिसकी बुराई बहुत अधिक फैली हुई होगी और वह क़ियामत का दिन है।
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