सूरह 73 · जुज़ 29
Al-Muzzammil · 73:14
يَوْمَ تَرْجُفُ الْأَرْضُ وَالْجِبَالُ وَكَانَتِ الْجِبَالُ كَثِيبًا مَهِيلًا
जिस दिन काँपेगी धरती और पर्वत तथा हो जायेंगे पर्वत, भुरभुरे रेत के ढेर।
तफ़सीर
यह यातना काफ़िरों को उस दिन होगी, जिस दिन धरती और पर्वत काँप उठेंगे और पर्वत उसकी भयावहता की गंभीरता से बिखरे हुए तरल रेत हो जाएँगे।
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