सूरह 72 · जुज़ 29
Al-Jinn · 72:19
وَأَنَّهُ لَمَّا قَامَ عَبْدُ اللَّهِ يَدْعُوهُ كَادُوا يَكُونُونَ عَلَيْهِ لِبَدًا
और ये कि जब खड़ा हुआ अल्लाह का भक्त[1] उसे पुकारता हुआ, तो समीप था कि वे लोग उसपर पिल पड़ते।
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1. अल्लाह के भक्त से अभिप्राय मुह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हैं। तथा भावार्थ यह है कि जिन्न तथा मनुष्य मिल कर क़ुर्आन तथा इस्लाम की राह से रोकना चाहते हैं।
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1. अल्लाह के भक्त से अभिप्राय मुह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हैं। तथा भावार्थ यह है कि जिन्न तथा मनुष्य मिल कर क़ुर्आन तथा इस्लाम की राह से रोकना चाहते हैं।
तफ़सीर
जब अल्लाह के बंदे मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम 'नख़ला' नामी स्थान में अपने पालनहार की इबादत करने के लिए खड़े हुए, तो जिन्न आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के क़ुरआन के पाठ को सुनने के लिए इस तरह भीड़ लगाए हुए थे, जैसे एक-दूसरे पर चढ़े जा रहे हैं।
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