सूरह 7 · जुज़ 8

Al-A'raf · 7:85

وَإِلَىٰ مَدْيَنَ أَخَاهُمْ شُعَيْبًا ۗ قَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللَّهَ مَا لَكُمْ مِنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُ ۖ قَدْ جَاءَتْكُمْ بَيِّنَةٌ مِنْ رَبِّكُمْ ۖ فَأَوْفُوا الْكَيْلَ وَالْمِيزَانَ وَلَا تَبْخَسُوا النَّاسَ أَشْيَاءَهُمْ وَلَا تُفْسِدُوا فِي الْأَرْضِ بَعْدَ إِصْلَاحِهَا ۚ ذَٰلِكُمْ خَيْرٌ لَكُمْ إِنْ كُنْتُمْ مُؤْمِنِينَ

तथा मद्यन[1] की ओर हमने उसके भाई शोऐब को रसूल बनाकर भेजा। उसने कहः हे मेरी जाति के लोगो! अल्लाह की इबादत (वंदना) करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं है। तुम्हारे पास तुम्हारे पालनहार का खुला तर्क (प्रमाण) आ गया है। अतः नाप और तोल पूरी करो और लोगों की चीज़ों में कमी न करो तथा धरती में उसके सुधार के पश्चात उपद्रव न करो। यही तुम्हारे लिए उत्त्म है, यदि तुम ईमान वाले हो।
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1. मद्यन एक क़बीले का नाम था। और उसी के नाम पर एक नगर बस गया, जो ह़िजाज़ के उत्तर-पश्चिम तथा फ़लस्तीन के दक्षिण में लाल सागर और अक़्बा खाड़ी के किनारे पर रहता था। यह लोग व्यपार करते थे। प्राचीन व्यपार राजपथ, लाल सागर के किनारे यमन से मक्का तथा यंबुआ होते हुये सीरिया तक जाता था।

तफ़सीर

हमने मदयन के गोत्र की ओर उनके भाई शुऐब अलैहिस्सलाम को भेजा। उन्होंने उनसे कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! अकेले अल्लाह की इबादत करो। उसके सिवा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं, जो इबादत के योग्य हो। मैं अपने रब की ओर से तुम्हारे पास जो कुछ लेकर आया हूँ उसकी सच्चाई का अल्लाह की ओर से तुम्हारे पास एक स्पष्ट प्रमाण आ चुका है। अतः नाप और तौल पूरे करके लोगों को उनके अधिकार दो। तथा लोगों का उनके सामान में दोष निकालकर और उसके प्रति अरुचि जगाकर, या उनके मालिकों को धोखा देकर घाटा न करो। इससे पहले नबियों के द्वारा धरती पर सुधार होने के बाद, कुफ़्र और पाप करके उसमें बिगाड़ न फैलाओ। यदि तुम मोमिन हो, तो जो कुछ उल्लेख किया गया है तुम्हारे लिए बेहतर और अधिक लाभकारी है। क्योंकि इसमें अल्लाह के निषेधों से बचने हेतु पापों का परित्याग करना शामिल है, और क्योंकि इसमें अल्लाह के आदेशों का पालन करके उसके क़रीब आना शामिल है।

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