सूरह 7 · जुज़ 8
Al-A'raf · 7:71
قَالَ قَدْ وَقَعَ عَلَيْكُمْ مِنْ رَبِّكُمْ رِجْسٌ وَغَضَبٌ ۖ أَتُجَادِلُونَنِي فِي أَسْمَاءٍ سَمَّيْتُمُوهَا أَنْتُمْ وَآبَاؤُكُمْ مَا نَزَّلَ اللَّهُ بِهَا مِنْ سُلْطَانٍ ۚ فَانْتَظِرُوا إِنِّي مَعَكُمْ مِنَ الْمُنْتَظِرِينَ
उसने कहाः तुमपर तुम्हारे पालनहार का प्रकोप और क्रोध आ पड़ा है। क्या तुम मुझसे कुछ (मूर्तियों के) नामों के विषय में विवाद कर रहे हो, जिनका तुमने तथा तुम्हारे पूर्वजों ने (पूज्य) नाम रखा है, जिसका कोई तर्क (प्रमाण) अल्लाह ने नहीं उतारा है? तो तुम (प्रकोप की) प्रतीक्षा करो और तुम्हारे साथ मैं भी प्रतीक्षा कर रहा हूँ।
तफ़सीर
हूद अलैहिस्सलाम ने उन्हें उत्तर देते हुए कहा : निश्चय तुम अल्लाह की यातना और प्रकोप के हक़दार बन चुके हो, इसलिए वह निश्चित रूप से तुमपर टूट पड़ने वाला है। क्या तुम मुझसे उन मूर्तियों के बारे में बहस करते हो, जिन्हें तुमने और तुम्हारे बाप-दादा ने पूज्य का नाम दे दिया है, जबकि उनकी कोई वास्तविकता नहीं है?! क्योंकि अल्लाह ने कोई प्रमाण नहीं उतारा है, जिसे तुम इनके पूज्य होने के अपने दावे पर तर्क बना सको। अतः जिस यातना को जल्दी लाने की तुमने माँग की है, उसकी प्रतीक्षा करो, मैं भी तुम्हारे साथ प्रतीक्षा करने वालों में से हूँ। क्योंकि उसे तो आना ही है।
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