सूरह 7 · जुज़ 8
Al-A'raf · 7:65
۞ وَإِلَىٰ عَادٍ أَخَاهُمْ هُودًا ۗ قَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللَّهَ مَا لَكُمْ مِنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُ ۚ أَفَلَا تَتَّقُونَ
(और इसी प्रकार) आद[1] की ओर उनके भाई हूद को (भेजा)। उसने कहाः हे मेरी जाति! अल्लाह की इबादत (वंदना) करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं। तो क्या तुम (उसकी अवज्ञा से) नहीं डरते?
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1. नूह़ की जाति के पश्चात अरब में आद जाति का उत्थान हूआ। जिस का निवास स्थान अह़क़ाफ़ का क्षेत्र था। जो ह़िजाज तथा यमामा के बीच स्थित है। उन की आबादियाँ उमान से ह़ज़रमौत और इराक़ तक फैली हुई थीं।
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1. नूह़ की जाति के पश्चात अरब में आद जाति का उत्थान हूआ। जिस का निवास स्थान अह़क़ाफ़ का क्षेत्र था। जो ह़िजाज तथा यमामा के बीच स्थित है। उन की आबादियाँ उमान से ह़ज़रमौत और इराक़ तक फैली हुई थीं।
तफ़सीर
और हमने आद के गोत्र की ओर उन्ही में से एक व्यक्ति हूद - अलैहिस्सलाम - को रसूल बनाकर भेजा। उन्होंने कहा : ऐ मेरी क़ौम के लोगो! केवल अल्लाह की इबादत करो। क्योंकि उसके सिवा तुम्हारा कोई सत्य पूज्य नहीं। तो क्या तुम उसके आदेशों का पालन करके तथा उसके निषेधों से बचकर, उससे नहीं डरते, ताकि तुम उसकी यातना से बच जाओ?!
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