सूरह 7 · जुज़ 8

Al-A'raf · 7:56

وَلَا تُفْسِدُوا فِي الْأَرْضِ بَعْدَ إِصْلَاحِهَا وَادْعُوهُ خَوْفًا وَطَمَعًا ۚ إِنَّ رَحْمَتَ اللَّهِ قَرِيبٌ مِنَ الْمُحْسِنِينَ

तथा धरती में उसके सुधार के पश्चात्[1] उपद्रव न करो और उसीसे डरते हुए तथा आशा रखते हुए[2] प्रार्थना करो। वास्तव में, अल्लाह की दया सदाचारियों के समीप है।
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1. अर्थात सत्धर्म और रसूलों द्वारा सुधार किये जाने के पश्चात। 2. अर्थात पापाचार से डरते और उस की दया की आशा रखते हुये।

तफ़सीर

तथा पाप करके धरती में बिगाड़ न फैलाओ, जबकि अल्लाह ने रसूलों को भेजकर और उसे केवल अपनी आज्ञाकारिता के साथ आबाद करके उसे सुधारा है। और केवल अल्लाह को पुकारो, उसकी सज़ा से डर महसूस करते हुए, और उसके प्रतिफल के प्राप्त होने की प्रतीक्षा करते हुए। निःसंदेह अल्लाह की दया अच्छे कर्म करने वालों के क़रीब है, अतः तुम भी उन्हीं में शामिल हो जाओ।

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