सूरह 7 · जुज़ 8
Al-A'raf · 7:5
فَمَا كَانَ دَعْوَاهُمْ إِذْ جَاءَهُمْ بَأْسُنَا إِلَّا أَنْ قَالُوا إِنَّا كُنَّا ظَالِمِينَ
और जब उनपर हमारा प्रकोप आ पड़ा, तो उनकी पुकार यही थी कि वास्तव में हम ही अत्याचारी[1] थे।
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1. अर्थात अपनी हठधर्मी को उस समय स्वीकार किया।
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1. अर्थात अपनी हठधर्मी को उस समय स्वीकार किया।
तफ़सीर
फिर यातना के उतर जाने के बाद उनसे इसके सिवा कुछ न बन पड़ा कि उन्होंने अल्लाह का इनकार करके अपने ऊपर अत्याचार करने के अपराध को स्वीकार कर लिया।
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