सूरह 7 · जुज़ 8

Al-A'raf · 7:43

وَنَزَعْنَا مَا فِي صُدُورِهِمْ مِنْ غِلٍّ تَجْرِي مِنْ تَحْتِهِمُ الْأَنْهَارُ ۖ وَقَالُوا الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي هَدَانَا لِهَٰذَا وَمَا كُنَّا لِنَهْتَدِيَ لَوْلَا أَنْ هَدَانَا اللَّهُ ۖ لَقَدْ جَاءَتْ رُسُلُ رَبِّنَا بِالْحَقِّ ۖ وَنُودُوا أَنْ تِلْكُمُ الْجَنَّةُ أُورِثْتُمُوهَا بِمَا كُنْتُمْ تَعْمَلُونَ

तथा उनके दिलों में जो द्वेष होगा, उसे हम निकाल देंगे[1]। उन (स्वर्गों में) बहती नहरें होंगी तथा वे कहेंगे कि उस अल्लाह की प्रशंसा है, जिसने हमें इसकी राह दिखाई और यदि अल्लाह हमें मार्गदर्शन न देता, तो हमें मार्गदर्शन न मिलता। हमारे पालनहार के रसूल सत्य लेकर आये तथा उन्हें पुकारा जायेगा कि इस स्वर्ग के अधिकारी तुम अपने सत्कर्मों के कारण हुए हो।
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1. स्वर्गियों को सब प्रकार के सुख-सुविधा के साथ यह भी बड़ी नेमत मिलेगी कि उन के दिलों का बैर निकाल दिया जायेगा, ताकि स्वर्ग में मित्र बन कर रहें। क्यों कि आपस के बैर से सब सुख किरकिरा हो जाता है।

तफ़सीर

जन्नत में उनके आनंद की पूर्णता में से एक यह है कि अल्लाह उनके दिलों में जो भी द्वेष और ईर्ष्या होगी निकालकर दूर कर देगा और उनके नीचे से नहरें जारी कर देगा। तथा वे अपने ऊपर अल्लाह की नेमतों को स्वीकार करते हुए कहेंगे : हर प्रकार की स्तुति अल्लाह के लिए है, जिसने हमें इस नेक कार्य की तौफ़ीक़ दी जिसके कारण हमें यह स्थान प्राप्त हुआ। तथा हम अपने दम पर इसमें सफल नहीं हो सकते थे, यदि ऐसा न होता कि अल्लाह ने हमें उसकी ओर मार्गदर्शन किया। निश्चय हमारे रब के रसूल निर्विवाद सत्य तथा वा'दे और वईद (धमकी) में सच्चाई के साथ आए, और एक पुकारने वाला उनके बीच पुकारकर कहेगा : यही वही जन्नत है जिसके बारे में मेरे रसूलों ने तुम्हें दुनिया में बताया था। यह जन्नत अल्लाह ने तुम्हें उन नेक कामों के बदले में दी है जो तुम करते थे, जिनसे तुम अल्लाह की प्रसन्नता चाहते थे।

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