सूरह 7 · जुज़ 8
Al-A'raf · 7:22
فَدَلَّاهُمَا بِغُرُورٍ ۚ فَلَمَّا ذَاقَا الشَّجَرَةَ بَدَتْ لَهُمَا سَوْآتُهُمَا وَطَفِقَا يَخْصِفَانِ عَلَيْهِمَا مِنْ وَرَقِ الْجَنَّةِ ۖ وَنَادَاهُمَا رَبُّهُمَا أَلَمْ أَنْهَكُمَا عَنْ تِلْكُمَا الشَّجَرَةِ وَأَقُلْ لَكُمَا إِنَّ الشَّيْطَانَ لَكُمَا عَدُوٌّ مُبِينٌ
तो उन दोनों को धोखे से रिझा लिया। फिर जब दोनों ने उस वृक्ष का स्वाद लिया, तो उनके लिए उनके गुप्तांग खुल गये और वे उनपर स्वर्ग के पत्ते चिपकाने लगे और उन्हें उनके पालनहार ने आवाज़ दीः क्या मैंने तुम्हें इस वृक्ष से नहीं रोका था और तुम दोनों से नहीं कहा था कि शैतान तुम्हारा खुला शत्रु है?
तफ़सीर
इस तरह उसने उन दोनों को धोखे से उस स्थान से नीचे उतार लिया, जहाँ वे थे। चुनाँचे जब उन दोनों ने उस पेड़ से खाया, जिसमें से उन्हें खाने से मना किया गया था, तो उनके लिए उनके गुप्तांग प्रकट हो गए और दोनों अपने गुप्तांगों को ढकने के लिए अपने आपपर जन्नत के पत्ते चिपकाने लगे। तथा उनके रब ने उन्हें यह कहते हुए आवाज़ दी : क्या मैंने तुम दोनों को इस पेड़ से खाने के लिए मना नहीं किया था और तुम्हें सावधान करते हुए नहीं कहा था : निःसंदेह शैतान तुम्हारा खुला दुश्मन है?!
पाठक में खोलें - पूरी सूरह पढ़ें