सूरह 7 · जुज़ 9
Al-A'raf · 7:204
وَإِذَا قُرِئَ الْقُرْآنُ فَاسْتَمِعُوا لَهُ وَأَنْصِتُوا لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ
और जब क़ुर्आन पढ़ा जाये, तो उसे ध्यान पूर्वक सुनो तथा मौन साध लो। शायद कि तुमपर दया[1] की जाये।
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1. यह क़ुर्आन की एक विशेषता है कि जब भी उसे पढ़ा जाये तो मुसलमान पर अनिवार्य है कि वह ध्यान लगा कर अल्लाह का कलाम सुने। हो सकता है कि उस पर अल्लाह की दया हो जाये। काफ़िर कहते थे कि जब क़ुर्आन पढ़ा जाये तो सुनो नहीं, बल्कि शोर-गुल करो। (देखियेः सूरह ह़ा-मीम सज्दाः26)
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1. यह क़ुर्आन की एक विशेषता है कि जब भी उसे पढ़ा जाये तो मुसलमान पर अनिवार्य है कि वह ध्यान लगा कर अल्लाह का कलाम सुने। हो सकता है कि उस पर अल्लाह की दया हो जाये। काफ़िर कहते थे कि जब क़ुर्आन पढ़ा जाये तो सुनो नहीं, बल्कि शोर-गुल करो। (देखियेः सूरह ह़ा-मीम सज्दाः26)
तफ़सीर
और जब क़ुरआन पढ़ा जाए, तो उसकी तिलावत को ध्यानपूर्वक सुनो तथा न बात करो और न किसी अन्य काम में व्यस्त हो, उम्मीद है अल्लाह तुमपर दया करे।
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