सूरह 7 · जुज़ 9
Al-A'raf · 7:202
وَإِخْوَانُهُمْ يَمُدُّونَهُمْ فِي الْغَيِّ ثُمَّ لَا يُقْصِرُونَ
और जो शैतानों के भाई हैं, वे उन्हें कुपथ में खींचते जाते हैं, फिर (उन्हें कुपथ करने में) तनिक भी कमी (आलस्य) नहीं करते।
तफ़सीर
दुराचारियों और काफ़िरों जैसे शैतान के भाइयों को, शैतान एक के बाद एक पाप में लिप्त करके उन्हें गुमराही में बढ़ाते जाते हैं। वे रुकने का नाम ही नहीं लेते, न शैतान बहकाने और गुमराह करने से और न ही दुराचारी लोग उनकी बात मानने और बुराई करने से।
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