सूरह 7 · जुज़ 8
Al-A'raf · 7:20
فَوَسْوَسَ لَهُمَا الشَّيْطَانُ لِيُبْدِيَ لَهُمَا مَا وُورِيَ عَنْهُمَا مِنْ سَوْآتِهِمَا وَقَالَ مَا نَهَاكُمَا رَبُّكُمَا عَنْ هَٰذِهِ الشَّجَرَةِ إِلَّا أَنْ تَكُونَا مَلَكَيْنِ أَوْ تَكُونَا مِنَ الْخَالِدِينَ
तो शैतान ने दोनों को संशय में डाल दिया, ताकि दोनों के लिए उनके गुप्तांगों को खोल दे, जो उनसे छुपाये गये थे और कहाः तुम्हारे पालनहार ने तुम दोनों को इस वृक्ष से केवल इसलिए रोक दिया है कि तुम दोनों फ़रिश्ते अथवा सदावासी हो जाओगे।
तफ़सीर
फिर इबलीस ने उन दोनों के मन में एक गुप्त बात डाली, ताकि उनके लिए प्रकट कर दे जो कुछ उनके गुप्तांगों में से उनसे छिपाया गया था। उसने उन दोनों से कहा : अल्लाह ने तुम दोनों को इस पेड़ से खाने से केवल इसलिए मना किया है कि कहीं तुम दोनों फ़रिश्ते न हो जाओ, अथवा जन्नत में हमेशा रहने वालों में से न हो जाओ।
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