सूरह 7 · जुज़ 8

Al-A'raf · 7:2

كِتَابٌ أُنْزِلَ إِلَيْكَ فَلَا يَكُنْ فِي صَدْرِكَ حَرَجٌ مِنْهُ لِتُنْذِرَ بِهِ وَذِكْرَىٰ لِلْمُؤْمِنِينَ

ये पुस्तक है, जो आपकी ओर उतारी गयी है। अतः (हे नबी!) आपके मन में इससे कोई संकोच न हो, ताकि आप इसके द्वारा सावधान करें[1] और ईमान वालों के लिए उपदेश है।
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1. अर्थात अल्लाह के इन्कार और उस के दुष्परिणाम से।

तफ़सीर

क़ुरआन-ए-करीम एक पुस्तक है, जिसे अल्लाह ने (ऐ रसूल!) आपपर उतारा है। अतः आपके सीने में उसके संबंध में कोई तंगी या संदेह न हो। अल्लाह ने इसे आपकी ओर इसलिए अवतरित किया है, ताकि आप उसके द्वारा लोगों को डराएँ और तर्क स्थापित करें, तथा उसके द्वारा ईमान वालों को नसीहत करें। क्योंकि वही लोग नसीहत से लाभान्वित होते हैं।

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