सूरह 7 · जुज़ 9

Al-A'raf · 7:172

وَإِذْ أَخَذَ رَبُّكَ مِنْ بَنِي آدَمَ مِنْ ظُهُورِهِمْ ذُرِّيَّتَهُمْ وَأَشْهَدَهُمْ عَلَىٰ أَنْفُسِهِمْ أَلَسْتُ بِرَبِّكُمْ ۖ قَالُوا بَلَىٰ ۛ شَهِدْنَا ۛ أَنْ تَقُولُوا يَوْمَ الْقِيَامَةِ إِنَّا كُنَّا عَنْ هَٰذَا غَافِلِينَ

तथा (वह समय याद करो) जब आपके पालनहार ने आदम के पुत्रों की पीठों से उनकी संतति को निकाला और उन्हें स्वयं उनपर साक्षी (गवाह) बनाते हुए कहाः क्या मैं तुम्हारा पालनहार नहीं हूँ? सबने कहाः क्यों नहीं? हम (इसके) साक्षी[1] हैं; ताकि प्रलय के दिन ये न कहो कि हम तो इससे असूचित थे।
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1. यह उस समय की बात है जब आदम अलैहिस्सलाम की उत्पत्ति के पश्चात् उन की सभी संतान को जो प्रलय तक होगी, उन की आत्माओं से अल्लाह ने अपने पालनहार होने की गवाही ली थी। (इब्ने कसीर)

तफ़सीर

तथा (ऐ मुहम्मद!) वह समय याद करें, जब आपके पालनहार ने आदम के पुत्रों की पीठों से उनकी संतति को निकाला और उनसे अपनी रुबूबीयत को साबित करने का इक़रार लिया, जो दरअसल उसने उनकी प्रकृति में रखी है कि वे उसे अपना सृष्टिकर्ता और पालनहार मानते हैं, यह कहते हुए कि "क्या मैं तुम्हारा पालनहार नहीं हूँ?" सबने कहा : "क्यों नहीं, तू हमारा पालनहार है।" अल्लाह ने कहा : "हमने तुम्हारा परीक्षण किया और तुमसे वचन लिया, ताकि तुम क़ियामत के दिन अपने विरुद्ध अल्लाह के तर्क का इनकार न कर दो और यह न कह दो कि हमें तो इसकी कोई ख़बर ही नहीं थी।"

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