सूरह 7 · जुज़ 9

Al-A'raf · 7:160

وَقَطَّعْنَاهُمُ اثْنَتَيْ عَشْرَةَ أَسْبَاطًا أُمَمًا ۚ وَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ مُوسَىٰ إِذِ اسْتَسْقَاهُ قَوْمُهُ أَنِ اضْرِبْ بِعَصَاكَ الْحَجَرَ ۖ فَانْبَجَسَتْ مِنْهُ اثْنَتَا عَشْرَةَ عَيْنًا ۖ قَدْ عَلِمَ كُلُّ أُنَاسٍ مَشْرَبَهُمْ ۚ وَظَلَّلْنَا عَلَيْهِمُ الْغَمَامَ وَأَنْزَلْنَا عَلَيْهِمُ الْمَنَّ وَالسَّلْوَىٰ ۖ كُلُوا مِنْ طَيِّبَاتِ مَا رَزَقْنَاكُمْ ۚ وَمَا ظَلَمُونَا وَلَٰكِنْ كَانُوا أَنْفُسَهُمْ يَظْلِمُونَ

और[1] हमने मूसा की जाति के बारह घरानों को बारह जातियों में विभक्त कर दिया और हमने मूसा की ओर वह़्यी भेजी, जब उसकी जाति ने उससे जल माँगा कि अपनी लाठी इस पत्थर पर मारो, तो उससे बारह स्रोत उबल पड़े तथा प्रत्येक समुदाय ने अपने पीने का स्थान जान लिया और उनपर बादलों की छाँव की और उनपर मन्न तथा सल्वा उतारा। (हमने कहाः) इन स्वच्छ चीज़ों में से, जो हमने तुम्हें प्रदान की हैं, खाओ और हमने उनपर अत्याचार नहीं किया, परन्तु वे स्वयं (अवज्ञा करके) अपने प्राणों पर अत्याचार कर रहे थे।
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1. इस से अभिप्राय वह लोग हैं जो मूसा (अलैहिस्सलाम) के लाये हुये धर्म पर क़ायम थे और आने वाले नबी की प्रतीक्षा कर रहे थे और जब वह आये तो तुरन्त आप पर ईमान लाये, जैसे अबदुल्लाह बिन सलाम इत्यादि।

तफ़सीर

और हमने बनी इसराईल को बारह गोत्रों में बाँट दिया, और हमने मूसा की ओर वह़्य भेजी, जब उनकी जाति ने उनसे अल्लाह से यह दुआ करने के लिए कहा कि वह उन्हें पानी पिलाए : (ऐ मूसा!) अपनी लाठी को इस पत्थर पर मारो। चुनाँचे मूसा ने उसपर लाठी मारी, तो उसमें से उनके बारह क़बीलों की संख्या के अनुसार बारह स्रोत फूट निकले। उनमें से प्रत्येक क़बीले ने अपने पानी पीने का विशेष स्थान जान लिया। इसलिए कोई भी अन्य क़बीला उसके साथ उसमें साझी नहीं होता था। और हमने उनपर बादलों की छाया कर दी, जो उनके चलने के साथ चलते थे और उनके रुकने से रुक जाते थे। और उनपर शहद की तरह एक मीठा पेय तथा बटेर के समान स्वादिष्ट माँस वाला एक छोटा पक्षी उतारा। और हमने उनसे कहा : इन पवित्र चीज़ों में से, जो हमने तुम्हें प्रदान की हैं, खाओ। और उन्होंने अत्याचार और नेमतों की नाशुक्री करके और यथोचित उनका आदर न करके हमारा कुछ भी घाटा नहीं किया। परंतु वे स्वयं अपने हितों का घाटा करके अपने आप ही पर अत्याचार करते थे, जब उन्होंने अल्लाह के आदेश का उल्लंघन करके और उसकी नेमतों की अवमानना करके अपने आपको विनाश के घाट लगा दिया।

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