सूरह 7 · जुज़ 9

Al-A'raf · 7:158

قُلْ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنِّي رَسُولُ اللَّهِ إِلَيْكُمْ جَمِيعًا الَّذِي لَهُ مُلْكُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ ۖ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ يُحْيِي وَيُمِيتُ ۖ فَآمِنُوا بِاللَّهِ وَرَسُولِهِ النَّبِيِّ الْأُمِّيِّ الَّذِي يُؤْمِنُ بِاللَّهِ وَكَلِمَاتِهِ وَاتَّبِعُوهُ لَعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَ

(हे नबी!) आप लोगों से कह दें कि हे मानव जाति के लोगो! मैं तुम सभी की ओर उस अल्लाह का रसूल हूँ, जिसके लिए आकाश तथा धरती का राज्य है। कोई वंदनीय (पूज्य) नहीं है, परन्तु वही, जो जीवन देता तथा मारता है। अतः अल्लाह पर ईमान लाओ और उसके उस उम्मी नबी पर, जो अल्लाह पर और उसकी सभी (आदि) पुस्तकों पर ईमान रखते हैं और उनका अनुसरण करो, ताकि तुम मार्गदर्शन पा जाओ[1]।
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1. इस आयत का भावार्थ यह है कि इस्लाम के नबी किसी विशेष जाति तथा देश के नबी नहीं हैं, प्रलय तक के लिये पूरी मानव जाति के नबी हैं। यह सब को एक अल्लाह की वंदना कराने के लिये आये हैं, जिस के सिवा कोई पूज्य नहीं। आप का चिन्ह अल्लाह पर तथा सब प्राचीन पुस्तकों और नबियों पर ईमान है। आप का अनुसरण करने का अर्थ यह है कि अब उसी प्रकार अल्लाह की पूजा अराधना करो, जैसे आप ने की और बताई है। और आप के लाये हुये धर्म विधान का पालन करो।

तफ़सीर

(ऐ रसूल!) आप कह दें : ऐ लोगो! मैं तुम सभी की ओर, अरब हों या ग़ैर-अरब, उस अल्लाह का रसूल बनकर आया हूँ, जिसके ही हाथ में आकाशों का राज्य है और उसी के लिए धरती का राज्य है, उस पवित्र अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं, वह मरे हुए लोगों को जीवित करता है, और जीवित लोगों को मौत देता है। इसलिए (ऐ लोगो!) अल्लाह पर ईमान लाओ और उसके रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर ईमान लाओ, जो ऐसे नबी हैं कि न पढ़ सकते हैं न लिख सकते हैं, बल्कि वह एक वह़्य के साथ आए हैं, जिसे उनका पालनहार उनकी ओर उतारता है, जो अल्लाह पर ईमान रखते हैं, तथा अपने ऊपर उतरने वाली पुस्तक पर ईमान रखते हैं और अपने पहले नबियों पर उतरने वाली पुस्तकों पर बिना किसी भेदभाव के ईमान रखते हैं, तथा जो कुछ वह अपने पालनहार की ओर से लाए हैं उसमें उनका अनुसरण करो, ताकि तुम वह रास्ता पा सको, जिसमें दुनिया एवं आख़िरत में तुम्हारा हित निहित है।

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