सूरह 7 · जुज़ 9
Al-A'raf · 7:155
وَاخْتَارَ مُوسَىٰ قَوْمَهُ سَبْعِينَ رَجُلًا لِمِيقَاتِنَا ۖ فَلَمَّا أَخَذَتْهُمُ الرَّجْفَةُ قَالَ رَبِّ لَوْ شِئْتَ أَهْلَكْتَهُمْ مِنْ قَبْلُ وَإِيَّايَ ۖ أَتُهْلِكُنَا بِمَا فَعَلَ السُّفَهَاءُ مِنَّا ۖ إِنْ هِيَ إِلَّا فِتْنَتُكَ تُضِلُّ بِهَا مَنْ تَشَاءُ وَتَهْدِي مَنْ تَشَاءُ ۖ أَنْتَ وَلِيُّنَا فَاغْفِرْ لَنَا وَارْحَمْنَا ۖ وَأَنْتَ خَيْرُ الْغَافِرِينَ
और मूसा ने हमारे निर्धारित[1] समय के लिए अपनी जाति के सत्तर व्यक्तियों को चुन लिया और जब उन्हें भूकंप ने घेर[2] लिया, तो मूसा ने कहाः हे मेरे पालनहार! यदि तू चाहता तो इन सबका इससे पहले ही विनाश कर देता और मेरा भी। क्या तू हमारा उस कुकर्म के कारण नाश कर देगा, जो हममें से कुछ निर्बोध कर गये? ये[3] तेरी ओर से केवल एक परीक्षा थी। तू जिसे चाहे, उसके द्वारा कुपथ कर दे और जिसे चाहे, सुपथ दर्शा दे। तू ही हमारा संरक्षक है, अतः हमारे पापों को क्षमा कर दे और हमपर दया कर, तू सर्वोत्तम क्षमावान् है।
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1. अल्लाह ने मूसा अलैहिस्सलाम को आदेश दिया था कि वह तूर पर्वत के पास बछड़े की पूजा से क्षमा याचना के लिये कुछ लोगों को लायें। (इब्ने कसीर) 2. जब वह उस स्थान पर पहुँचे तो उन्हों ने यह माँग की कि हम को हमारी आँखों से अल्लाह को दिखा दे। अन्यथा हम तेरा विश्वास नहीं करेंगे। उस समय उन पर भूकम्प आया। (इब्ने कसीर) 3. अर्थात बछड़े की पूजा।
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1. अल्लाह ने मूसा अलैहिस्सलाम को आदेश दिया था कि वह तूर पर्वत के पास बछड़े की पूजा से क्षमा याचना के लिये कुछ लोगों को लायें। (इब्ने कसीर) 2. जब वह उस स्थान पर पहुँचे तो उन्हों ने यह माँग की कि हम को हमारी आँखों से अल्लाह को दिखा दे। अन्यथा हम तेरा विश्वास नहीं करेंगे। उस समय उन पर भूकम्प आया। (इब्ने कसीर) 3. अर्थात बछड़े की पूजा।
तफ़सीर
और मूसा अलैहिस्सलाम ने अपनी जाति के सत्तर नेक लोगों को चुन लिया, ताकि वे अपने पालनहार से उस गुनाह की क्षमा माँगें, जो उनके मूर्खों ने बछड़े की पूजा की है। और अल्लाह ने उनसे एक निर्धारित समय का वादा किया जिसमें वे उपस्थित हों। लेकिन जब वे उपस्थित हुए, तो अल्लाह पर दुस्साहस कर बैठे और मूसा अलैहिस्सलाम से मुतालबा किया कि उन्हें आँखों से (खुल्लम-खुल्ला) अल्लाह का दर्शन कराएँ। इसपर उन्हें भूकंप ने अपनी चपेट में ले लिया और वे उसकी भयावहता से बेहोश होकर मर गए। ऐसे में मूसा ने अपने पालनहार से विनयपूर्वक विनती करते हुए कहा : ऐ मेरे पालनहार! अगर तू उन्हें तथा उनके साथ मुझे उनके यहाँ आने से पहले ही विनष्ट करना चाहता, तो विनष्ट कर देता। क्या तू हमें उसके कारण विनष्ट करता है जो हममें से अल्प बुद्धि वाले लोगों ने किया है? दरअसल मेरी जाति के लोगों का बछड़े की पूजा में लगना एक आज़माइश और परीक्षा है, जिसके द्वारा तू जिसे चाहता है, मार्ग से हटा देता है और जिसे चाहता है, सीधे रास्ते पर लगा देता है। तू ही हमारे मामले का संरक्षक है। अतः हमारे गुनाहों को क्षमा कर दे, और अपनी व्यापक दया के साथ हम पर दया कर। तू ही सबसे बेहतर पाप को क्षमा करने वाला और गुनाह को माफ़ करने वाला है।
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