सूरह 7 · जुज़ 9
Al-A'raf · 7:126
وَمَا تَنْقِمُ مِنَّا إِلَّا أَنْ آمَنَّا بِآيَاتِ رَبِّنَا لَمَّا جَاءَتْنَا ۚ رَبَّنَا أَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْرًا وَتَوَفَّنَا مُسْلِمِينَ
तू हमसे इसी बात का तो बदला ले रहा है कि हमारे पास हमारे पालनहार की आयतें (निशानियाँ) आ गयीं? तो हम उनपर ईमान ला चुके हैं। हे हमारे पालनहार! हमपर धैर्य (की धारा) उंडेल दे! और हमें इस दशा में (संसार से) उठा कि तेरे आज्ञाकारी रहें।
तफ़सीर
और तुम्हारे निकट (ऐ फिरऔन!) हमारा दोष केवल यह है कि हमने अपने रब की निशानियों को सत्य मान लिया, जब वे मूसा अलैहिसल्लाम के हाथ पर हमारे पास आईं। यदि यह कोई दोष दिया जाने वाला पाप है, तो यह हमारा पाप है। फिर वे विनयपूर्वक अपने रब से दुआ करने लगे : ऐ हमारे पालनहार! हमपर धैर्य उड़ेल दे, ताकि हम सत्य पर अडिग रहें। तथा हमें इस हाल में मौत दे कि हम तेरे प्रति समर्पित हों, तेरे आदेश का पालन करने वाले तथा तेरे रसूल का अनुसरण करने वाले हों।
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