सूरह 67 · जुज़ 29
Al-Mulk · 67:17
أَمْ أَمِنْتُمْ مَنْ فِي السَّمَاءِ أَنْ يُرْسِلَ عَلَيْكُمْ حَاصِبًا ۖ فَسَتَعْلَمُونَ كَيْفَ نَذِيرِ
अथवा निर्भय हो गये उससे जो आकाश में है कि वह भेज दे तुम पर पथरीली वायु तो तुम्हें ज्ञान हो जायेगा कि कैसा रहा मेरा सावधान करना?
तफ़सीर
क्या तुम उस अल्लाह से, जो आकाश में है, निडर हो गए हो कि वह तुमपर आकाश से पत्थर बरसा दे, जैसे लूत अलैहिस्सलाम की जाति पर बरसाया था?! फिर जब तुम मेरी यातना को देखोगे, तो तुम्हें मेरी चेतावनी का पता चल जाएगा, लेकिन यातना देख लेने के बाद तुम्हें इससे कोई फायदा नहीं होगा।
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