सूरह 63 · जुज़ 28
Al-Munafiqun · 63:6
سَوَاءٌ عَلَيْهِمْ أَسْتَغْفَرْتَ لَهُمْ أَمْ لَمْ تَسْتَغْفِرْ لَهُمْ لَنْ يَغْفِرَ اللَّهُ لَهُمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ لَا يَهْدِي الْقَوْمَ الْفَاسِقِينَ
हे नबी! उनके समीप समान है कि आप क्षमा की प्रार्थना करें उनके लिए अथवा क्षमा की प्रार्थना न करें उनके लिए। कदापि नहीं क्षमा करेगा अल्लाह उन्हें। वास्तव में अल्लाह सुपथ नहीं दिखाता है अवज्ञाकारियों को।
तफ़सीर
(ऐ रसूल) आपका उनके गुनाहों के लिए क्षमा याचना करना और उनके लिए क्षमा याचना न करना दोनों बराबर है। अल्लाह उनके गुनाहों को हरगिज़ माफ़ नहीं करेगा। अल्लाह उन लोगों को सामर्थ्य प्रदान नहीं करता, जो उसकी आज्ञाकारिता से निकल जाने वाले और उसकी अवज्ञा पर अड़े रहने वाले हैं।
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