सूरह 63 · जुज़ 28

Al-Munafiqun · 63:10

وَأَنْفِقُوا مِنْ مَا رَزَقْنَاكُمْ مِنْ قَبْلِ أَنْ يَأْتِيَ أَحَدَكُمُ الْمَوْتُ فَيَقُولَ رَبِّ لَوْلَا أَخَّرْتَنِي إِلَىٰ أَجَلٍ قَرِيبٍ فَأَصَّدَّقَ وَأَكُنْ مِنَ الصَّالِحِينَ

तथा दान करो उसमें से, जो प्रदान किया है हमने तुम्हें, इससे पूर्व कि आ जाये तुममें से किसी के मरण का[1] समय, तो कहे कि मेरे पालनहार! क्यों नहीं अवसर दे दिया मुझे कुछ समय का। ताकि मैं दान करता तथा सदाचारियों में हो जाता।
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1. ह़दीस में है कि मनुष्य का वास्तविक धन वही है जिस को वह इस संसार में दान कर जाये। और जिसे वह छोड़ जाये तो वह उस का नहीं बल्कि उस के वारिस का धन है। (सह़ीह़ बुख़ारीः 6442)

तफ़सीर

और अल्लाह की राह में उन धनों में से खर्च करो, जो अल्लाह ने तुम्हें दिए हैं, इससे पहले कि तुममें से किसी की मौत आ जाए, फिर वह अपने पालनहार से कहे : ऐ मेरे पालनहार! तूने मुझे थोड़ी-सी मोहलत क्यों न दी कि मैं अल्लाह की राह में अपना धन दान करता और अल्लाह के उन नेक बंदों में से हो जाता, जिनके कर्म नेक होते हैं।

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