सूरह 61 · जुज़ 28
As-Saff · 61:3
كَبُرَ مَقْتًا عِنْدَ اللَّهِ أَنْ تَقُولُوا مَا لَا تَفْعَلُونَ
अत्यंत अप्रिय है अल्लाह को तुम्हारी वह बात कहना, जिसे तुम (स्वयं) करते नहीं।
तफ़सीर
यह अल्लाह के निकट बहुत घृणित और अप्रिय बात है कि तुम वह कहो जो तुम करते नहीं। इसलिए मोमिन के लिए उचित यही है कि वह अल्लाह के साथ सच्चा हो। उसकी करनी उसकी कथनी की पुष्टि करे।
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