सूरह 6 · जुज़ 7
Al-An'am · 6:82
الَّذِينَ آمَنُوا وَلَمْ يَلْبِسُوا إِيمَانَهُمْ بِظُلْمٍ أُولَٰئِكَ لَهُمُ الْأَمْنُ وَهُمْ مُهْتَدُونَ
जो लोग ईमान लाये और अपने ईमान को अत्याचार (शिर्क) से लिप्त नहीं[1] किया, उन्हीं के लिए शान्ति है तथा वही मार्गदर्शन पर हैं।
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1. ह़दीस में है कि जब यह आयत उतरी तो नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथियों ने कहाः हम में कौन है जिस ने अत्याचार न किया हो? उस समय वह आयत उतरी, जिस का अर्थ यह है कि निश्चय शिर्क (मिश्रणवाद) ही सब से बड़ा अत्याचार है। (सह़ीह़ बुख़ारीः4629)
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1. ह़दीस में है कि जब यह आयत उतरी तो नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथियों ने कहाः हम में कौन है जिस ने अत्याचार न किया हो? उस समय वह आयत उतरी, जिस का अर्थ यह है कि निश्चय शिर्क (मिश्रणवाद) ही सब से बड़ा अत्याचार है। (सह़ीह़ बुख़ारीः4629)
तफ़सीर
जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए तथा उसके बनाए हुए नियमों का पालन किया, और अपने ईमान के साथ शिर्क की मिलावट नहीं की, वही लोग सफल हैं, उन्हें उनके पालनहार ने हिदायत के मार्ग पर चलने की तौफ़ीक दी है।
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