सूरह 6 · जुज़ 7
Al-An'am · 6:8
وَقَالُوا لَوْلَا أُنْزِلَ عَلَيْهِ مَلَكٌ ۖ وَلَوْ أَنْزَلْنَا مَلَكًا لَقُضِيَ الْأَمْرُ ثُمَّ لَا يُنْظَرُونَ
तथा उन्होंने कहाः[1] इस (नबी) पर कोई फ़रिश्ता क्यों नहीं उतारा[2] गया? और यदि हम कोई फ़रिश्ता उतार देते, तो निर्णय ही कर दिया जाता, फिर उन्हें अवसर नहीं दिया जाता[3]।
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1. जैसा कि वह माँग करते हैं। (देखियेः सूरह बनी इस्राईल, आयतः93) 2. अर्थात अपने वास्तविक रूप में, जब कि जिब्रील (अलैहिस्सलाम) मनुष्य के रूप में आया करते थे। 3. अर्थात मानने या न मानने का।
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1. जैसा कि वह माँग करते हैं। (देखियेः सूरह बनी इस्राईल, आयतः93) 2. अर्थात अपने वास्तविक रूप में, जब कि जिब्रील (अलैहिस्सलाम) मनुष्य के रूप में आया करते थे। 3. अर्थात मानने या न मानने का।
तफ़सीर
और इन काफिरों ने कहा : यदि अल्लाह ने मुहम्मद के साथ कोई फ़रिश्ता उतारा होता, जो हमसे बात करता और गवाही देता कि वह एक रसूल हैं, तो हम अवश्य ईमान ले आते। और यदि हमने उनके चाहने के अनुसार कोई फ़रिश्ता उतारा होता, तो निश्चय हम उन्हें नष्ट कर देते यदि वे ईमान नहीं लाते, और यदि वे उतरते तो उन्हें तौबा करने का समय नहीं दिया जाता।
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