सूरह 6 · जुज़ 7

Al-An'am · 6:70

وَذَرِ الَّذِينَ اتَّخَذُوا دِينَهُمْ لَعِبًا وَلَهْوًا وَغَرَّتْهُمُ الْحَيَاةُ الدُّنْيَا ۚ وَذَكِّرْ بِهِ أَنْ تُبْسَلَ نَفْسٌ بِمَا كَسَبَتْ لَيْسَ لَهَا مِنْ دُونِ اللَّهِ وَلِيٌّ وَلَا شَفِيعٌ وَإِنْ تَعْدِلْ كُلَّ عَدْلٍ لَا يُؤْخَذْ مِنْهَا ۗ أُولَٰئِكَ الَّذِينَ أُبْسِلُوا بِمَا كَسَبُوا ۖ لَهُمْ شَرَابٌ مِنْ حَمِيمٍ وَعَذَابٌ أَلِيمٌ بِمَا كَانُوا يَكْفُرُونَ

तथा आप उन्हें छोड़ें जिन्होंने अपने धर्म को क्रीड़ा और खेल बना लिया है। दरअसल सांसारिक जीवन ने उन्हें धोखे में डाल रखा है। आप इस (क़ुर्आन) द्वारा उन्हें शिक्षा दें। ताकि कोई प्राणी अपने करतूतों के कारण बंधक न बन जाये, जिसका अल्लाह के सिवा कोई सहायक और अभिस्तावक (सिफ़ारिशी) न होगा।फिर यदि वे, सबकुछ बदले में दे दें, तो भी उनसे नहीं लिया जायेगा[1]। यही लोग अपने करतूतों के कारण बंधक होंगे। उनके लिए उनके कुफ़्र (अविश्वास) के कारण खौलता पेय तथा दुःखदायी यातना होगी।
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1. संसारिक दण्ड से बचाव के लिये तीन साधनों से काम लिया जाता है- मैत्री, सिफ़ारिश और अर्थदण्ड। परन्तु अल्लाह के हाँ ऐसे साधन किसी काम नहीं आयेंगे। वहाँ केवल ईमान और सत्कर्म ही काम आयेंगे।

तफ़सीर

और ऐ रसूल! इन मुश्रिकों को छोड़ दें, जिन्होंने अपने धर्म को खेल-कूद और मनोरंजन बना लिया कि वे उसका मज़ाक उड़ाते और उपहास करते हैं, और इस दुनिया के जीवन ने उन्हें अपने नश्वर सुखों के साथ धोखे में डाल रखा है। (ऐ नबी!) क़ुरआन के साथ लोगों को उपदेश दें ताकि कोई भी प्राणी अपनी कमाई हुई बुराइयों के कारण विनाश की ओर न जाए, उसके लिए मदद माँगने के लिए अल्लाह के अलावा कोई सहयोगी न हो, और क़ियामत के दिन उससे अल्लाह की यातना को रोकने के लिए कोई सिफ़ारिश करने वाला न हो। तथा यदि वह कोई भी छुड़ौती देकर अल्लाह की यातना से छुटकारा लेना चाहे, तो वह उससे स्वीकार नहीं की जाएगी। यही लोग हैं, जो अपने पापों के कारण अपने आपके विनाश के हवाले कर दिए गए। उन्हें क़ियामत के दिन उनके कुफ़्र के कारण अत्यंत गरम पेय पिलाया जाएगा और दर्दनाक यातना दी जाएगी।

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