सूरह 6 · जुज़ 7
Al-An'am · 6:54
وَإِذَا جَاءَكَ الَّذِينَ يُؤْمِنُونَ بِآيَاتِنَا فَقُلْ سَلَامٌ عَلَيْكُمْ ۖ كَتَبَ رَبُّكُمْ عَلَىٰ نَفْسِهِ الرَّحْمَةَ ۖ أَنَّهُ مَنْ عَمِلَ مِنْكُمْ سُوءًا بِجَهَالَةٍ ثُمَّ تَابَ مِنْ بَعْدِهِ وَأَصْلَحَ فَأَنَّهُ غَفُورٌ رَحِيمٌ
तथा (हे नबी!) जब आपके पास वे लोग आयें, जो हमारी आयतों (क़ुर्आन) पर ईमान लाये हैं, तो आप कहें कि तुम[1] पर सलाम (शान्ति) है। अल्लाह ने अपने ऊपर दया अनिवार्य कर ली है कि तुममें से जो भी अज्ञानता के कारण, कोई कुकर्म कर लेगा, फिर उसके पश्चात् तौबा (क्षमा याचना) कर लेगा और अपना सुधार कर लेगा, तो निःसंदेह अल्लाह अति क्षमाशील दयावान् है।
____________________
1. अर्तथात उन के सलाम का उत्तर दें, और उन का आदर सम्मान करें।
____________________
1. अर्तथात उन के सलाम का उत्तर दें, और उन का आदर सम्मान करें।
तफ़सीर
जब (ऐ रसूल!) आपके पास वे लोग आएँ, जो हमारी उन आयतों पर ईमान रखते हैं, जो आपके लाए हुए संदेश की सच्चाई की गवाही देती हैं, तो उनके सम्मान में उन्हें सलाम कहें और उन्हें अल्लाह की दया की विशालता की खुशख़बरी दें। क्योंकि अल्लाह ने अपने अनुग्रह से दया करना अपने ऊपर अनिवार्य कर लिया है। अतः तुममें से जो कोई भी अज्ञानता और मूर्खता की स्थिति में पाप कर बैठे, फिर वह उसे करने के बाद तौबा कर ले और अपने कर्मों को सुधार ले, तो निश्चय अल्लाह उसके किए हुए पाप को क्षमा कर देगा। क्योंकि अल्लाह अपने तौबा करने वाले बंदों को क्षमा करने वाला, तथा उनपर दया करने वाला है।
पाठक में खोलें - पूरी सूरह पढ़ें