सूरह 6 · जुज़ 7

Al-An'am · 6:52

وَلَا تَطْرُدِ الَّذِينَ يَدْعُونَ رَبَّهُمْ بِالْغَدَاةِ وَالْعَشِيِّ يُرِيدُونَ وَجْهَهُ ۖ مَا عَلَيْكَ مِنْ حِسَابِهِمْ مِنْ شَيْءٍ وَمَا مِنْ حِسَابِكَ عَلَيْهِمْ مِنْ شَيْءٍ فَتَطْرُدَهُمْ فَتَكُونَ مِنَ الظَّالِمِينَ

(हे नबी!) आप उन्हें अपने से दूर न करें, जो अपने पालनहार की वंदना प्रातः संध्या करते एवं उसकी प्रसन्नता की चाह में लगे रहते हैं। उनके ह़िसाब का कोई भार आपपर नहीं है और न आपके ह़िसाब का कोई भार उनपर[1] है, अतः यदि आप उन्हें दूर करेंगे, तो अत्याचारियों में हो जायेंगे।
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1. अर्थात न आप उन के कर्मों के उत्तरदायी हैं, न वे आप के कर्मों के। रिवायतों से विध्दित होता है कि मक्का के कुछ धनी मिश्रणवादियों ने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से कहा कि हम आप की बातें सुनना चाहते हैं, किन्तु आप के पास नीच लोग रहते हैं, जिन के साथ हम नहीं बैठ सकते। इसी पर यह आयत उतरी। (इबने कसीर) ह़दीस में है कि अल्लाह, तुमहारे रूप और वस्त्र नहीं देखता किन्तु तुम्हारे दिलों और कर्मों को देखता है। (सह़ीह़ मुस्लिमः2564)

तफ़सीर

(ऐ रसूल!) आप उन ग़रीब मुसलमानों को अपनी सभा से दूर न करें, जो दिन की शुरुआत और उसके अंत में हमेशा अल्लाह की उपासना में लगे रहते हैं, उसी के लिए उपासना को विशिष्ट करने वाले होते हैं। आप प्रमुख बहुदेववादियों को लुभाने के लिए उन्हें दूर मत करें। इन ग़रीबों के हिसाब में से आपपर कुछ भी नहीं है। बल्कि उनका हिसाब उनके रब के पास है। तथा आपके हिसाब में से उनपर भी कुछ नहीं है। यदि आपने उन्हें अपनी सभा से दूर किया, तो आप अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करने वालों में से होंगे।

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