सूरह 6 · जुज़ 7
Al-An'am · 6:5
فَقَدْ كَذَّبُوا بِالْحَقِّ لَمَّا جَاءَهُمْ ۖ فَسَوْفَ يَأْتِيهِمْ أَنْبَاءُ مَا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
उन्होंने सत्य को झुठला दिया है, जब भी उनके पास आया। तो शीघ्र ही उनके पास उसके समाचार आ जायेंगे[1], जिसका उपहास कर रहे हैं।
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1. अर्थात उस के तथ्य का ज्ञान हो जायेगा। यह आयत मक्का में उस समय उतरी जब मुसलमान विवश थे, परन्तु बद्र के युध्द के बाद यह भविष्यवाणी पूरी होने लगी और अन्ततः मिश्रणवादी परास्त हो गये।
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1. अर्थात उस के तथ्य का ज्ञान हो जायेगा। यह आयत मक्का में उस समय उतरी जब मुसलमान विवश थे, परन्तु बद्र के युध्द के बाद यह भविष्यवाणी पूरी होने लगी और अन्ततः मिश्रणवादी परास्त हो गये।
तफ़सीर
यदि उन्होंने उन स्पष्ट तर्कों और खुले प्रमाणों से मुँह मोड़ लिया, तो निःसंदेह वे उससे भी अधिक स्पष्ट चीज़ से मुँह मोड़ चुके हैं। क्योंकि उन्होंने उस क़ुरआन को झुठलाया है, जो मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम लेकर आए। और जब वे क़ियामत के दिन यातना को देख लेंगे, तो उनकी समझ में आ जाएगा कि जिसका वे उपहास किया करते थे, वही सत्य है।
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