सूरह 6 · जुज़ 7
Al-An'am · 6:36
۞ إِنَّمَا يَسْتَجِيبُ الَّذِينَ يَسْمَعُونَ ۘ وَالْمَوْتَىٰ يَبْعَثُهُمُ اللَّهُ ثُمَّ إِلَيْهِ يُرْجَعُونَ
आपकी बात वही स्वीकार करेंगे, जो सुनते हों, परन्तु जो मुर्दे हैं, उन्हें अल्लाह[1] ही जीवित करेगा, फिर उसी की ओर फेरे जायेंगे।
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1. अर्थात प्रलय के दिन उन की समाधियों से। आयत का भावार्थ यह है कि आप के सदुपदेश को वही स्वीकार करेंगे, जिन की अन्तरात्मा जीवित हो। परन्तु जिन के दिल निर्जीव हैं, तो यदि आप धरती अथवा आकाश से ला कर उन्हें कोई चमत्कार भी दिखा दें, तब भी वह उन के लिये व्यर्थ होगा। यह सत्य को स्वीकार करने की योग्यता ही खो चुके हैं।
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1. अर्थात प्रलय के दिन उन की समाधियों से। आयत का भावार्थ यह है कि आप के सदुपदेश को वही स्वीकार करेंगे, जिन की अन्तरात्मा जीवित हो। परन्तु जिन के दिल निर्जीव हैं, तो यदि आप धरती अथवा आकाश से ला कर उन्हें कोई चमत्कार भी दिखा दें, तब भी वह उन के लिये व्यर्थ होगा। यह सत्य को स्वीकार करने की योग्यता ही खो चुके हैं।
तफ़सीर
आपकी लाई बातों को स्वीकार करते हुए केवल वही आपको उत्तर देंगे, जो लोग बात को सुनते और समझते हैं, और काफिर लोग तो मरे हुए हैं जिनका उनसे कोई लेना-देना नहीं है। क्योंकि उनके दिल मर चुके हैं। और मरे हुओं को अल्लाह क़ियामत के दिन पुनर्जीवित करके उठाएगा, फिर वे उसी अकेले की ओर लौटाए जाएँगे, ताकि वह उन्हें उनके किए का बदला दे।
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